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मुखिया और वार्ड सदस्यों के विवाद में रुका पड़ा है विकास कार्य,




मुखिया और वार्ड सदस्यों के बीच तालमेल नहीं होने के कारण पटना समेत लगभग पुरे बिहार में मुख्यमंत्री के सात निश्चय कार्यक्रम के तहत होने वाला विकास कार्य फंसा हुआ हैं. गौरतलब है की अकेले पटना जिले में दो सौ ऐसी परियोजनाएं फंसी हुई है जिसमे काम रुका हुआ है या जैसे तैसे काम करवा कर खानापूर्ति कर दी गयी है. कही मुखिया द्वारा प्रशाशनिक स्वीकृति नहीं दी गयी है या देने में देर की गयी है तो कहीं हर घर नल जल योजना में घटिया और पुराने पाइप का इस्तेमाल किया गया, बोरिंग नहीं या सही रूप से नहीं किया गया है. नली गली योजना में भी घाटियां सामग्री इस्तेमाल करने की भी शिकायत उठती रही है.

इसे देखते हुए पटना के जिलाधिकारी कुमार रवि ने जांच के आदेश जारी कर दिया है. कुमार रवि ने बताया की जिन योजनाओ में विवाद है या शिकायत आयी है उसकी जांच बीडीओ या जिला स्तर के पदाधिकारी से कराई जा रही है.कई योजनाओं में अधिकारीयों और पंचायत प्रतिनिधियों पर एफआईआर दर्ज करने क आदेश भी दिया जा चूका है.


क्या है योजना स्वीकृति का नियम और क्यों फंसती है परियोजना 

जिला पंचायती राज पदाधिकारी सुषमा कुमारी ने बताया की पंचायत में चल रही योजनाओं को तकनिकी स्वीकृति बीडीओ के स्तर से डी जानी है जबकि प्रशासनिक स्वीकृति मुखिया के द्वारा दिया जाता है. राशि पहले मुखिया के खाते में आवंटित होकर आ जाती है जिसे मुखिया वार्ड सदस्य के खाते में ट्रांसफर करते है काम करने के लिए. इसी बीच अगर मुखिया और वार्ड सदस्य के बीच में अगर कोई विवाद होता है तो काम रुक जाता है. वार्ड सदस्यों की शिकायत होती है की मुखिया जी राशि नहीं देते है या देने में देर करते है वहीं मुखिया का कहना  होता है की वार्ड सदस्यों ने अपने रिश्तेदार या सगे सम्बन्धी को वार्ड सचिव बना लिया है. ऐसे में राशि में घोटाले की आशंका होती है तो फण्ड का ट्रांसफर कैसे करें. 

बरहाल कारण जो भी हो भुगतना तो आम जनता को ही पड़ता है. लोगों का कहना है की ये सब गड़बड़ी कमीशन को लेकर होती है. इस बार से पहले सिर्फ मुखिया का एकक्षत्र राज होता था लेकिन अब सरकार ने नियम कड़े कर दिए है और काम करवाने  का जिम्मा भी वार्ड सदस्य को सौंपा है और इसी में दोनों पक्ष में कमीशन को लेकर विवाद होता रहता है.
 


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