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"टोटल धमाल" धमाल सीरीज की तीसरी फिल्म हुई रिलीज़




ग्रांड मस्ती, सुपर नानी और ग्रेट ग्रांड मस्ती की असफलता के बाद निर्देशक इंद्र कुमार को 'धमाल' सीरीज की याद आई। धमाल (2007) और डबल धमाल (2011) के बाद उन्होंने इस सीरिज की तीसरी फिल्म 'टोटल धमाल' (2019) नाम से बनाई है।

टोटल धमाल में कुछ किरदार धमाल सीरिज के हैं। कलाकार वही हैं लेकिन उनका किरदार बदल गया है। कुछ नए कलाकार भी जोड़ लिए गए हैं। अनिल कपूर, माधुरी दीक्षित, रितेश देशमुख, अजय देवगन जैसे सितारे कई बार इंद्र कुमार के साथ काम कर चुके हैं और इस बार उन्होंने सभी को साथ में जमा किया है। कलाकारों और किरदारों में तो इंद्र कुमार ने हेरफेर कर दिया है, लेकिन कहानी वही की वही दोहरा दी है। इस बार भी धमाल सीरिज पैसों के इर्दगिर्द घूमती है। एक आदमी मरने के पहले बता देता है कि उसने पैसा कहां छिपा रखा है और फिर सारे किरदारों में उस छिपे खजाने को ढूंढने की होड़ मच जाती है।

दो छोटे-मोटे चोर (अजय देवगन और संजय मिश्रा), तलाक की राह पर खड़े पति-पत्नी (अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित), फायर ब्रिगेड से फायर किए गए दो कर्मचारी (रितेश देशमुख और पितोबश त्रिपाठी), होशियार और बेवकूफ भाई (अरशद वारसी और जावेद जाफरी) तथा पुलिस कमिश्नर (बोमन ईरानी) इस खजाने को हासिल करने के लिए जनकपुर के लिए निकल पड़ते हैं।

कोई कार में, कोई हेलिकॉप्टर में, कोई प्लेन में जाते हुए वे रेगिस्तान, जंगल, नदी को पार करते हुए जनकपुर के चिड़ियाघर में जा पहुंचते हैं जहां पर खजाना छिपा हुआ है। इन कलाकारों की भीड़ में हाथी, शेर, बंदर और चिंपाजी भी शामिल हो जाते हैं।

निर्देशक इंद्र कुमार और उनके लेखकों की टीम के पास 'धमाल' सीरिज में बताने के लिए कुछ नया नहीं था इसलिए उन्होंने पुरानी बातों को ही दोहरा दिया। उनका एकमात्र उद्देश्य दर्शकों को हंसाना और मनोरंजन इसलिए उन्होंने कुछ सीन भी दोहरा मारे। फिल्म की शुरुआत अच्छी है, लेकिन जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ने लगती है, समझ में आने लगता है कि बात को खींचा जा रहा है। फिल्म को इंद्र कुमार ने ऐसे बनाया है मानो फिल्म शुरू होने के कुछ देर बाद ही क्लाइमैक्स शुरू हो गया हो।

सब भागते रहते हैं और रास्ते में मुसीबतों का सामना करते रहते हैं। इसके जरिये हास्य पैदा किया गया है। कभी हेलिकॉप्टर को सीलिंग फैन और घासलेट से चलाया जा रहा है तो कभी किसी की कार पानी में डूबने लगती है। कोई जंगल में फंसता है तो कोई बिल्डिंग पर लटकता है।

इनमें से कुछ सीन मजेदार भी बन पड़े हैं जैसे जॉनी लीवर और रितेश का हेलिकॉप्टर वाला सीन, जीपीएस पर अजय देवगन को रास्ता बताती हुई टपोरी भाषा (जैकी श्रॉफ का वाइस ओवर शानदार है) और अजय का पीछा करते हुए बोमन का टनल में घुसना। तो कुछ सीन झल्लाहट भी पैदा करते हैं जिनमें से ज्यादातर अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित के हिस्से में आए हैं। कुछ चुटकुले भी चिपका दिए गए हैं जिनका फिल्म की कहानी से कोई लेना-देना नहीं है। ऐसी फिल्मों में तर्क-वितर्क की कोई गुंजाइश नहीं है और फिल्म में इस ओर ज्यादा ध्यान भी नहीं दिया है।

निर्देशक के रूप में इंद्र कुमार दर्शकों को  hansane लिए उन्होंने सारी बातें आजमाई हैं। कहानी को सरल और सीधे तरीके से उन्होंने दिखाया है। उन्होंने अपनी टारगेट ऑडियंस का ध्यान रखा है और कॉमेडी को अश्लीलता से दूर रखा है। पैसा भी अच्छा खर्च किया है।

अजय देवगन का अभिनय ठीक-ठाक है, लेकिन उनके पास करने को कुछ ज्यादा नहीं था। फिल्म उनके स्टारडम के साथ न्याय नहीं करती। अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित मंझे हुए खिलाड़ी हैं और इस तरह के रोल करना उनके लिए बेहद आसान है। बड़े स्टार्स के फिल्म में आने का असर अरशद वारसी और जावेद जाफरी पर हुआ है और उनके मौके सीमित हो गए। रितेश देशमुख और जॉनी लीवर हंसाते हैं। संजय मिश्रा और बोमन ईरानी ओवर एक्टिंग करते नजर आए। ईशा गुप्ता फिल्म के क्लाइमैक्स में नजर आती हैं। फिल्म में एक युवा हीरोइन की कमी खलती है। गानों के नाम पर नया कुछ नहीं मिला तो दो पुराने गानों को ही रिमिक्स की मिक्सी में डाल कर पेश कर दिया गया है। सोनाक्षी सिन्हा वाला गाना एकदम ठंडा है।



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