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बिहार विधान परिषद के 17 सदस्यों का कार्यकाल खत्म, इतिहास में तीसरी बार सदन के प्रमुख का पद हुआ खाली




लॉकडाउन की वजह से बिहार विधान परिषद  का चुनाव स्थगित होने के कारण बुधवार को परिषद के 17 सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया। दरअसल चुनाव आयोग  ने  पिछले तीन अप्रैल को कोरोनाबंदी की वजह से विधान परिषद के शिक्षक, स्नातक और विधानसभा क्षेत्र में होने वाले चुनाव को स्थगित किया था। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए चार और स्नातक निवार्चन क्षेत्र के लिए चार सीटों पर चुनाव होना था। साथ ही विधानसभा कोटे से भी नौ सीटों के लिए भी चुनाव की प्रक्रिया सम्पन्न होनी थी।

इन नेताओं का समाप्त हुआ कार्यकाल :- 

चुनाव स्थगित होने से जिन दिग्गज नेताओं का बुधवार को कार्यकाल समाप्त हो गया उनमें,  बिहार विधान परिषद के कार्यकारी सभापति हारुन रशीद, जदयू के अशोक चौधरी, पीके। शाही, सोनेलाल मेहता, सतीश कुमार और हीरा प्रसाद बिंद, बीजेपी के कृष्ण कुमार सिंह, संजय मयूख के अलावा  राधामोहन शर्मा के नाम शामिल हैं।


इसी तरह जदयू के स्नातक निवार्चन क्षेत्र पटना से सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री नीरज कुमार, तिरहुत स्नातक क्षेत्र से निर्दलीय देवेशचंद्र ठाकुर, दरभंगा स्नातक क्षेत्र से जदयू के दिलीप चौधरी, कोसी स्नातक क्षेत्र से एन. के. यादव हैं। साथ ही शिक्षक निवार्चन क्षेत्र पटना से भाजपा के प्रो। नवलकिशोर यादव, तिरहुत शिक्षक क्षेत्र से भाकपा के प्रो। संजय कुमार सिंह, दरभंगा शिक्षक निवार्चन क्षेत्र से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ। मदन मोहन झा और सारण शिक्षक निवार्चन क्षेत्र से भाकपा के केदारनाथ पांडेय का नाम शामिल है।

मंत्री बने रहेंगे ये दो नेता -

हालांकि संविधान विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बावजूद अशोक चौधरी और श्री नीरज कुमार अगले 6 महीने पद पर कायम रहेंगे। संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत किसी व्यक्ति के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहने पर भी वह छह माह तक मंत्री के पद पर बना रहा सकता है। हालांकि इस अवधि में उसके लिए  दोनों में से किसी भी सदन का सदस्य बनना जरूरी है। वैसे इन दिनों मंत्रियों को  विधान परिषद के सदस्य के रूप में प्राप्त होने वाली सुविधाएं इनको नहीं  मिलेंगी।

बिहार विधान परिषद के आज तक के इतिहास में यह तीसरा मौका है जब सदन के प्रमुख का पद खाली  हो गया हो। पहले भी  1980 और 1985 में सभापति और उप सभापति का पद खाली था। संविधान विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर सभापति और उप सभापति का पद खाली है तो राज्यपाल के पास शक्ति आ जाती है। बता दें कि 23 मई को राज्यपाल के जरिए मनोनीत 12 सीटें भी खाली हो रही हैं। इस तरह 75 सदस्यीय विधान परिषद की 29 सीटें इस महीने रिक्त हो जाएंगी। 




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