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इंग्लैंड के क्लिफ्टॉन की तर्ज पर राजगीर में बना सस्पेंशन ब्रिज, जानें खूबियां




नेचर सफार यानि प्रकृति की गोद में आनंद ही आनंद। नालंदा, नवादा और गया के 500 हेक्टेयर वन क्षेत्र में इसका निर्माण किया गया है। इसमें बनाया गया देश का पहला ग्लास स्काई वॉक ने खूब धूम मचाया। इसके बाद यहां इंग्लैंड के क्लिफ्टॉन की तर्ज पर सस्पेंशन ब्रिज बनाया गया है। यह राजगीर की पंच पहाड़ियों में शामिल वैभारगिरि की दो पर्वत श्रृंखलाओं को जोड़ता है।

135 मीटर लंबा और 6 फीट चौड़ा यह सूबे का पहला टूरिस्ट सस्पेंशन ब्रिज (झूला पुल) है। इसपर करीब 50 लाख रुपये खर्च आये हैं। सबसे खास बात यह कि इसका निर्माण स्थानीय कारीगरों व मजदूरों ने ही किया है। जबकि, ग्लास स्काई वॉक के निर्माण के लिए मुम्बई से कारीगर बुलाये गये थे।

ग्लास स्काई वॉक में अब भी कुछ काम शेष है। सतह पर लगाये गये सीसे में संवेशनशीलता डाली जाएगी। अर्थात, उसपर पैर रखते ही सीसा चनकने जैसा प्रतीत होगा। सीसा का रूप भी कुछ देर के लिए वैसा ही हो जाएगा। आवाज उसी तरह की आएगी। लेकिन, इसके पहले कुछ दिन उस सीसा को सामान्य ही छोड़ दिया जाना है। क्योंकि, संवेशनशीलता डालने के बाद सैलानियों के भयभीत होने की आशंका बनी रहेगी।

रस्सों के दो सेट:

इसमें मुख्यत: दो रस्सों के सेट हैं, जो मार्ग के दोनों ओर रज्जुवक की आकृति में लटक रहे हैं। लोहे की जंजीर के सहारे ये पुल लटके हुए हैं। ग्लास स्काई वॉक से थोड़ी दूरी पर यह झूला पुल बनाया गया है। इसमें लोहे की रस्सी के अलावा लकड़ी का उपयोग किया गया है।

कई खास अंतर:

ग्लास स्काई वॉक व सस्पेंशन ब्रिज में कई अंतर हैं। ग्लास स्काई वॉक 200 मीटर गड्ढे के ऊपर बनाया गया है, जो सैलानियों को हवा में तैरने का अनुभव कराता है। यह दो पहाड़ों को नहीं जोड़ता है। इसपर एक साथ 30 से 40 लोगों को ही चढ़ने की अनुमति दी जानी है। जबकि, झूला पुल पर चलने का अलग ही मजा होगा। पूरे शरीर में गजब की लचक पैदा होगी। रस्सी के सहारे इस ओर से दूसरी ओर जाया जा सकेगा। इसपर सैलानियों की संख्या सीमित नहीं होगी। 100 लोग एक साथ आर-पार जा सकेंगे। इसमें चप्पल-जूते खोलने की जरूरत नहीं होगी। जबकि, ग्लास सस्पेंशन ब्रिज पर चढ़ने के पहले चप्पल-जूते खोलवा लिये जाएंगे।

पांच मिनट का समय:

सस्पेंशन ब्रिज की 135 मीटर दूरी को तय करने में औसतन 5 मिनट का समय लगेगा। दूसरी छोर पर आदिवासी र्पेंंटग करायी गयी है। कई झोपड़ियों में आदिवासियों के रहन-सहन को दिखाया गया है। यह प्रागैतिहासिक काल की झलक दिखाएगी।

सुरक्षा गार्ड:

सस्पेंशन ब्रिज के दोनों ओर गेट बनाये गये हैं। दोनों ही ओर के फर्श इस तरह डिजाइन किये गये हैं कि सैलानियों की सुरक्षा हो सके। इसके अलावा, दोनों ओर सुरक्षा गार्ड भी तैनात रहेंगे।

नालंदा डीएफओ के नेशामणि ने कहा कि नेचर सफारी के साथ ही जू-सफारी को लोगों के लिए खोलने की तैयारी अंतिम चरण में है। सभी तैयारियों को फाइनल टच दिया जा रहा है। खासकर, सैलानियों की सुरक्षा को कई स्तर से समीक्षा की जा रही है।


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