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नहीं बंद होंगे बिहार के 900 प्राइवेट ITI, केंद्र सरकार ने वापस लिया डीजीटी का आदेश




ITI संस्थानों में कम से कम चार ट्रेड में पढ़ाने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। केंद्र सरकार के इस आदेश से राज्य के 900 प्राइवेट आईटीआई बंद होने से बच गई।  अगर यह आदेश लागू होता तो यह सभी आईटीआई बंद हो जाते। बीते दिनों में केंद्र सरकार के प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) ने पत्र जारी कर कहा कि देश के सभी प्राइवेट ITI में कम से कम चार ट्रेड की पढ़ाई जरूरी है। 4 अगस्त 2021 को जारी आदेश के तहत 2023 तक सभी ITI संस्थानों को चार ट्रेडों में पढ़ाई शुरू कर देनी थी।

डीजीटी के इस आदेश के बाद देशभर के निजी ITI संचालकों ने आंदोलन शुरू कर दिया। प्राइवेट ITI संघ ने डीजीटी को पत्र लिखकर विरोध जताया। इसके साथ ही दिल्ली उच्च न्यायालय में एक याचिका भी दायर की। जिसके बाद 13 सितंबर को डीजीटी के संयुक्त निदेशक ने कोर्ट के आदेश से संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। डीजीटी ने गूगल फॉर्म पर मांगा कि देश के कितने आईटीआई संचालक हैं जो सरकार के आदेश का पालन करते हुए संस्थान को चार ट्रेड में अपग्रेड करने में सक्षम नहीं हैं। इस पर बिहार से 650 से अधिक तो देश में आठ हजार से अधिक प्राइवेट ITI  संचालकों ने गूगल फॉर्म के माध्यम से डीजीटी को बताया कि वे मौजूदा ITI परिसर में चार ट्रेड की पढ़ाई कराने में सक्षम नहीं हैं। निजी आईटीआई संचालकों की ओर से दिए गए इस जवाब के बावजूद डीजीटी अपने आदेश पर अड़ा रहा। डीजीटी के अनुसार सभी आईटीआई संचालकों को एक गैर इंजीनियरिंग विषयों मसलन सिलाई-कढ़ाई और उन्नत ट्रेड मसलन ड्रोन टेक्नोलॉजी आदि की पढ़ाई को अनिवार्य करना था। जिसके बाद देश भर के प्राइवेट ITI संचालकों ने 26 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के मुरैना से दिल्ली तक पदयात्रा की। इसके बाद डीजीटी ने प्राइवेट ITI  संचालकों से बातचीत की और अपना निर्णय वापस लिया। लेकिन डीजीटी के नए आदेश के अनुसार अब साल 2018 से पहले जिस ITI को मान्यता मिली है। उनको चार ट्रेड की बाध्यता नहीं रहेगी। लेकिन 2018 के बाद जिन आईटीआई संचालकों ने मान्यता ली है। उन्हें चार ट्रेडों में पढ़ाई करवानी होगी। 

 


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