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दो दर्जन और शिक्षकों को फ़र्ज़ी नियुक्ति करार देते हुए नौकरी से निकाला गया, वेतन की होगी वसूली




औरंगाबाद के मदनपुर प्रखंड के दो दर्जन प्रखंड शिक्षकों की नौकरी उनकी नियुक्ति के दिन से ही अवैध मानकर समाप्त कर दी गई है। शिक्षा विभाग के राज्य अपीलीय प्राधिकार ने इन शिक्षकों की नियुक्ति को पूरी तरह से धोखाधड़ी और जालसाजी भी माना है और इसके लिए इस प्रखंड के बीडीओ और बीईओ को जिम्मेवार मानते हुए उन पर कार्रवाई का निर्देश दिया है।

इससे पूर्व दो अन्य मामलों की सुनवाई करते हुए राज्य अपीलीय प्राधिकार ने नालंदा के 22 और सहरसा के 5 शिक्षकों की नियुक्ति को अवैध मानते हुए इन्हें आदेश निर्गत करने की तिथि से हटाने का फैसला सुनाया है। इस तरह कुल 51 शिक्षकों की नौकरी से हटा दिया गया है। 

औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड का यह मामला 2013 का है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) ने अपनी जांच में नियुक्तियों को अवैध मानते हुए इन शिक्षकों को हटाने का निर्देश दिया था। इसके खिलाफ जिला शिक्षक अपीलीय प्राधिकार में प्रभावित शिक्षक गए और डीडीए ने शिक्षकों को राहत दे दी। इसके बाद डीईओ राज्य अपीलीय प्राधिकार में गए।  प्राधिकार के चेयरमैन अशोक कुमार सिन्हा ने 21 पृष्ठों का अपना फैसला दिया है।इसमें पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को भी शामिल करते हुए उन्होंने निष्कर्ष दिया है कि इन अवैध नियुक्तियों के लिए बीडीओ और बीईओ जिम्मेदार हैं। जिला पदाधिकारी को इन दोनों के खिलाफ आरोप गठित कर उचित सिफारिश के साथ सरकार को भेजने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही उचित कानूनी सलाह लेने के बाद डीएम, प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड 
 शिक्षा पदाधिकारी पर आपराधिक मामला भी दर्ज करवाएंगे। 

यह भी माना गया है कि मेधा सूची बनाने में गड़बड़ी की गयी है । बीटीईटी और प्रशिक्षण का जाली प्रमाण पत्र नियुक्ति का आधार बनाया गया। प्राधिकार के अध्यक्ष ने फैसले में कहा है कि नियुक्ति की तिथि से ही नियुक्ति निरस्त की जाती है। प्रतिवादियों को उनके रद्द की गई नियुक्तियों के आधार पर एक दिन के लिए भी काम करने के योग्य नहीं समझा जाएगा। इनके वेतन का कोई बकाया भुगतान नहीं किया जाएगा। यदि कुछ भुगतान किया गया है, तो वह उनसे जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा वसूल किया जाएगा। उन्होंने डीएम को तय समय सीमा में प्राधिकरण के आदेश को निष्पादित करने को कहा है।
 
 




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